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सत्ता में साझेदारी की कार्य-प्रणाली
1. सूचना अधिकार आन्दोलन के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर- सूचना का अधिकार आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य सत्ता में आंशिक साझेदारी करना, सरकारी काम काज पर नियंत्रण रखना तथा सरकार एवं सरकारी मुलाजिमों के कार्यों को सार्वजनिक करना है।
2. सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं?
उत्तर- सत्ता में साझेदारी के कई प्रकार हैं। जिन सामाजिक समूहों को सीधे तौर पर सत्ता में साझेदारी की सम्भावना नहीं बनती है उन्हें संवैधानिक उपबन्धों के माध्यम से सत्ता में साझेदारी सौंपी जाती है। भारतीय संदर्भ में महिलाओं, एंग्लो इण्डियन, अल्पसंख्यक एवं कमजोर समुदाय तथा अन्य कुछ समूहों को विधायिका एवं प्रशासन में हिस्सेदारी के लिए भारतीय संविधान में विशेष उपबंध किए गए हैं।
मंत्रिमण्डल में जातीय एवं अन्य आधारों पर मंत्री बनाकर जाति तथा अन्य सामाजिक समूहों को सत्ता में भागीदारी दे दी जाती है।
राजनैतिक दलों के माध्यम से सत्ता में साझेदारी लोकतंत्र के संदर्भ में सबसे आसान समझवाली साझेदारी है। राजनैतिक सत्ता हासिल करने वाले दल, सत्ता के बँटवारे में मोल-तोल, पार्टियों द्वारा साझे सरकार का गठन इत्यादि में साझेदारी कर गठबंधन सरकार बनाकर देश चलाती हैं।
जनसंघर्ष एवं जनांदोलन, दबाव समूह जैसी राजनैतिक स्थितियों के द्वारा भी सत्ता में साझेदारी के मार्ग खुलते हैं।
3. ग्राम पंचायतों के प्रमुख अंग कौन-कौन हैं?
उत्तर- ग्राम पंचायत के प्रमुख चार अंग हैं। इनके नाम हैं- (i) ग्राम सभा (ii) मुखिया (iii) ग्राम रक्षा दल एवं (iv) ग्राम कचहरी।
4. संघ राज्य का अर्थ बताएँ।
उत्तर- जब सत्ता का विभाजन केन्द्रीय, राज्य या क्षेत्रीय स्तर एवं स्थानीय सरकारों के बीच वितरित कर दिया जाता है तो वह संघीय राज्य कहलाता है किन्तु सर्वोच्च सत्ता केन्द्र के पास होती है।
5. संघीय शासन की दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर- (i) संघीय शासन व्यवस्था के अन्तर्गत दो स्तर की सरकारें होती हैं केन्द्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर। (ii)अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती हैं।
6. लैंगिक असमानता क्या है?
उत्तर- लिंग के आधार पर समाज में महिलाओं व पुरुषों में जो असमानता पायी जाती है उसे लैंगिक असमानता कहते हैं। यह असमानता सामाजिक आर्थिक राजनीतिक व अन्य क्षेत्रों में पाई जाती है।
7. नगर निगम के आय के प्रमुख साधनों को बताएँ।
उत्तर- नगर निगम अपने कार्यों के संचालन हेतु कई प्रकार से आय अर्जित करता है। नगर निगम कई प्रकार के कर लगाता है। विभिन्न प्रकार के करों में मकान कर, जल कर, शौचालय कर, पशुओं पर कर, छोटे वाहनों पर कर, ठेला, रिक्शा पर कर आदि प्रमुख हैं।
इन करों से प्राप्त आय की राशि इतनी कम होती है कि नगर निगम का कार्य इससे नहीं चल पाता। जिसके चलते राज्य सरकार समय-समय पर आर्थिक अनुदान देकर निगम के वार्षिक बजट की क्षतिपूर्ति करती है। नगर निगम विभिन्न प्रकार के नीलामी के माध्यम से आय अर्जित करता है।
8. ग्राम पंचायत के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन करें।
उत्तर- कार्य – (i) पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजना तथा वार्षिक बजट तैयार करना। (ii) प्राकृतिक आपदा में सहायता प्रदान करना। (iii) सार्वजनिक संपत्ति से अतिक्रमण हटाना। स्वैच्छिक श्रमिकों को संगठित करना और सामुदायिक कार्यों में स्वैच्छिक सहयोग करना।
शक्तियाँ- (i) संपत्ति अर्जन, धारण और उसके निपटारन की तथा उसकी संविदा करने की शक्ति। (ii) करारोपण की शक्ति। (iii) राज्यवित्त आयोग की अनुशंसा पर संचित निधि से सहायक अनुदान प्राप्त करने का अधिकार।
9. नगर परिषद् (जिला-परिषद) के कार्यों का उल्लेख करें।
उत्तर- नगर परिषद् के अनिवार्य कार्यों में नगर की सफाई करना, सड़कों एवं गलियों में रोशनी का प्रबंध करना, पीने के पानी की व्यवस्था करना, सड़क बनवाना तथा उसकी मरम्मत करवाना, नालियों की सफाई करना, प्राथमिक शिक्षा का प्रबंध करना, स्कूल खोलना तथा उसे चलाना, महामारी से बचाव करना तथा टीके आदि की व्यवस्था कर उसे लगवाना, मनुष्यों एवं पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल हेतु अस्पताल खोलना, आग से सुरक्षा के प्रबंध करना, लाशों के दफन वं दाह संस्कार हेतु उपयुक्त स्थानों की व्यवस्था करना तथा जन्म एवं मृत्यु का निबंधन करना उनका लेखा-जोखा रखना आदि।
नगर परिषद् के ऐच्छिक कार्यों में नई सड़क बनवाना, गलियाँ एवं नालियाँ बनवाना, शहर के गन्दे इलाके को बसने योग्य बनाना, निर्धनों के लिए घर बनाना, बिजली का प्रबंध करना, प्रदर्शनी लगवाना, पार्क, बगीचा तथा अजायबघर बनवाकर नगरवासियों के मनोरंजन एवं स्वास्थ्य सम्बंधी जरूरतों को पूरा करना, पुस्तकालय एवं वाचनालय आदि का प्रबंध करवाना आदि।
10. भाषा के आधार पर भारत विश्व का सर्वाधिक विविधताओं वाला देश है। कैसे?
उत्तर- 1991 ई. की जनगणना में 1500 भाषाओं की पहचान मातृभाषा के रूप में हुई। जब भाषा अर्थात् कुछ मिलती-जुलती भाषाओं का समूह बना दिया जाता है या वर्गीकरण कर दिया जाता है तो 114 भाषाओं का वर्ग बन जाता है। जैसे हिन्दी में भोजपुरी, बुन्देलखण्डी, छत्तीसगढ़ी, राजस्थानी, भीली आदि भाषाओं को जोड़ दिया गया। इन भाषाओं में से 22 भाषाओं-असमियां, बांग्ला, वोडो, हिन्दी, गुजराती, डोंगरी, कश्मीरी, कन्नड़, कोंकणी, मराठी, मैथिली. मणिपुरी. मलयालम, नेपाली, पंजाबी, उड़िया, सिन्धी, संथाली. संस्कृत. तेलगू, तमिल, उर्दू को संविधान के अष्टम् अनुसूची में स्थान दिया गया है। ये भाषाएँ अनुसूचित भाषाएँ हैं। सबसे बड़ी हिन्दी भाषा है। हिन्दी बोलने वाले लोगों का प्रतिशत सबसे ज्यादा है। यही कारण है कि हिन्दी को राजभाषा के रूप में मान्यता मिली है। इतने भाषा-भाषी क्षेत्र के लोग भारत में साथ-साथ रहते हैं। भाषा के आधार पर विवाद न हो इसके लिए हिन्दी के साथ अंग्रेजी को भी मान्यता प्रदान करना ही भाषा नीति है।
11. ग्राम कचहरी के गठन की प्रक्रिया एवं शक्ति का वर्णन करें।
उत्तर- ग्राम कचहरी ग्रामीण अदालत है। यह अदालत न्यायिक कार्य करता है। ग्राम पंचायत की कार्यपालिका का प्रधान मुखिया होता है। न्यायपालिका का प्रधान सरपंच होता है। ग्राम पंचायत में एक ग्राम कचहरी होती है। माना प्रधान सरपंच होता है। इसका चयन प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से किया जा है। प्रति 500 की आबादी पर एक पंच होता है जिसका निर्वाचन द्वारा चयन होता है। इन सबों का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। ग्राम कचहरी दिवानी तथा फौजदारी दोनों प्रकार के मामलों को देखती है। ग्राम कचहरी अधिकतर 10 हजार मूल्य के सभी प्रकार के मामलों की सुनवाई कर सकता है। ग्राम कचहरी में बिहार सरकार ने न्याय मित्रों एवं न्याय सचिवों का प्रावधान किया है। न्याय मित्र सरपंच को सहयोग देने का कार्य करते हैं क्योंकि ये कान के जानकार होते हैं। न्याय सचिव ग्राम कचहरी के कागजातों की देखभाल तथा कागजातों को रखने का कार्य करता है।
12. सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- विभिन्न सामाजिक समूहों के मध्य अभिव्यक्ति एवं पहचान के लिए सत्ता का विभाजन होता है। इस प्रकार की व्यवस्था से समूहों के हितों एवं जरूरतों को सम्मान दिया जाता है तथा विभिन्न समूह टकराने से बच जाते हैं। सत्ता में साझेदारी द्वारा सार्वजनिक सहमति बनाने का प्रयास किया जाता है। सत्ता में साझेदारी कभी भी समूहों को आपसी संघर्ष एवं प्रतिस्पर्धा को स्वीकृत नहीं करता बल्कि सत्ता की मुख्य धारा में आकर अपने मुद्दे को
सुलझाने की बात करता है। भारत की ज्वलन्त समस्या नक्सली आन्दोलन है। उनसे बार-बार सत्ता यह आग्रह कर रही है कि वे हिंसा का रास्ता छोड कर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल हों। सत्ता में साझेदारी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का हृदय है।
13. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में क्या महत्व रखती है?
उत्तर- लोकतंत्र शासन-प्रणाली में जनता का, जनता के लिए तथा जनता के द्वारा शासन होता है। जिस शासन व्यवस्था में राजनैतिक साझेदारी हो. वह अत्यन्त ही सशक्त प्रणाली है। यह हिस्सेदारी की व्यवस्था जिस शासन व्यवस्था में की जाती है। लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था कहलाती है। गैर लोकतांत्रिक सरकारें (जैसे एक दलीय शासन प्रणाली, राजशाही या तानाशाही जैसी स्थितियाँ) सभी को सत्ता में साझेदारी, सभी नागरिकों के लिए सत्ता की व्यवस्था में विश्वास नहीं रखती। ऐसी शासन प्रणाली प्रायः आन्तरिक सामाजिक समूहों में व्याप्त मतभेदों, विभिन्नताओं एवं अन्तरों की या तो अनदेखी करती हैं या इन्हें कुचल कर रख देती हैं। लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था ही सामाजिक विभाजनों में प्रतिद्वन्द्विता समाप्त करती है। दोनों ही व्यवस्थाओं में समहों के टकराव को टालने या उनके विध्वंसक रूप लेने के पहले बुझा देने का प्रयास किया जाता है। लोकतंत्र प्रणाली में इसे शान्तिपूर्ण सहमति एवं साझेदारी द्वारा जबकि अन्य प्रणाली में इसे सख्ती या दबाव द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
14. ग्राम पंचायत के गठन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर- ग्राम पंचायत ग्रामीण क्षेत्रों की सबसे निचली पायदान की स्वायत्त संस्था है। ग्राम पंचायतों के गठन का आधार 7000 की औसत आबादी पर निर्धारित की गयी है। एक पंचायती क्षेत्र के अन्तर्गत 500 की आबादी पर एक वार्ड का गठन होता है। 15-16 की संख्या में वार्ड सदस्यों का चयन मतदान पद्धति द्वारा किया जाता है। पंचायत का प्रधान मुखिया होता है। एक उपमुखिया का पद भी सृजित है। सरकार द्वारा नियुक्त पंचायत सेवक पंचायत का सचिव (पदेन) होता है।
पंचायत में महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। मुखिया समेत पंचायत का सामान्यतः कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है। मुखिया या उपमुखिया अपनी इच्छा से त्यागपत्र देकर हट सकता है। उसे अपना त्याग पन जिला पंचायत पदाधिकारी को भेजना पड़ता है। यदि मुखिया को पंचायत हटाना चाहती है तो ग्राम पंचायत की दो-तिहाई बहुमत से उसे हटाया जा सकता है।
ग्राम पंचायत गाँवों के विकास की योजना बनाती है। यह ग्राम विकास का कार्य करती है। पंचायतें मेला कर, हाट कर, वाहन कर आदि लगा सकता है।
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