Class 10th Hindi

Class 10th Hindi Ati Sudho Sneh ko Marg hai Chapter Wise Short & Long Question | कक्षा 10वीं हिन्दी का चैप्टर वाइज प्रशन | चैप्टर नाम- अति सूधो सनेह को मारग है मो अंसुवनिहिं ले बरसौ


Class 10th – कक्षा 10वीं

विषय→ हिन्दी – Hindi

लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रशन 

3. अति सूधो सनेह को मारग है मो अंसुवनिहिं ले बरसौ


1. कवि कहाँ अपने आँसुओं को पहुँचाना चाहता है और क्यों? 

उत्तर⇒ मन की पीड़ा और करुणा की धार के रूप में आँसू निकलते और आहत मन को आनन्द प्रदान करते हैं । कवि चूँकि स्वयं प्रेम की पीर से व्याकुल है, इसलिए दूसरे संतप्त लोगों की पीड़ा की गहन अनुभूति उसे है। अतएव, वह चाहता है कि उसके ये आँसू दुखीजनों में नवजीवन का संचार करें।


2. घनानन्द के अनुसार परहित के लिए देह धारण कौन करता है? 

उत्तर⇒ परहित के लिए (दूसरों की भलाई के लिए) बादल देह धारण करता है। बादल जल का भंडार होता है और वह बनता ही है बरसने के लिए। बरसने के बाद उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। बादल सूखी धरती पर बरसकर उसे हरा-भरा बना देता है। गर्मी से तप्त धरती को सुकून देने के लिए बादल अपने अस्तित्व को समाप्त कर लेता है।


3. ‘मो अँसुवानिहिं लै बरसौ’ सवैये का भावार्थ लिखें। या, ‘सज्जन परमार्थ के कारण ही शरीर धारण करते हैं’ भाव वाले घनानंद रचित सवैये का अर्थ लिखिए। 

उत्तर⇒ ‘अति ‘मो अँसुवानिहिं लै बरसौ’ सवैया में कवि घनानंद मेघ के माध्यम से अपने अंतर की वेदना को व्यक्त करते हुए कहते हैं – बादलों ने परहित के लिए ही शरीर धारण किया है। वे अपने आँसुओं की वर्षा एक समान सभी पर करते हैं। पुनः घनानंद बादलों से कहते हैं-तुम तो जीवनदायक हो, कुछ मेरे हृदय की भी सुध लो, कभी मुझ पर भी विश्वास कर मेरे आँगन में अपनी रस- वर्षा करो।


4. ‘मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं’ से कवि का क्या तात्पर्य है?

उत्तर⇒ कवि घनानंद ने प्रेम-मार्ग की विशेषता का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह ऐसा मार्ग है जिसमें मन चला जाता है किन्तु कुछ मिलता नहीं। वस्तुतः ‘मन’ के यहाँ दो अर्थ हैं, एक ‘अन्तर’ अर्थात् हृदय और दूसरा माप की इकाई ‘मन’ जो अपने जमाने में सर्वाधिक वजनी माना जाता था। इस प्रकार, एक अर्थ यह है कि प्रेम-मार्ग में सर्वाधिक ‘मन’ देना है, किन्तु पाना एक छटाँक भी नहीं है। दूसरा अर्थ है ‘हृदय’ देना है किन्तु प्रतिदान की आशा नहीं रखना है। वस्तुतः कवि के ‘मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं’ कहने का तात्पर्य यह है कि प्रेम-मार्ग उत्सर्ग का मार्ग है, इस पर प्रतिदान के आकांक्षी नहीं चलते।


5. घनानंद किस मुगल बादशाह के मीरमुंशी थे? 

उत्तर⇒ घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मदशाह रंगीले के मीरमुंशी थे।


6. घनानंद की भाँति रीतिमुक्त धारा के और कौन-कौन कवि हैं? 

उत्तर⇒ घनानंद की तरह रीतिमुक्त धारा के अन्य कवि हैं-रसखान एवं भूषण आदि ।


7. किस कवि को साक्षात् रसमूर्त्ति कहा जाता है? 

उत्तर⇒ घनानंद को साक्षात् रसमूर्त्ति कहा जाता है।


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