Class 9th Geography (भूगोल) Subjective Question

Class 9th Geography Chapter Wise Short & Long Question | भारत : भूमि एवं लोग (भूगोल) चैप्टर नाम- भारत के पड़ोसी देश (Neighbouring Countries of India)


Class 9th – कक्षा 9वीं

विषय – भारत : भूमि एवं लोग (Geography)

Objective Question (वस्तुनिष्ठ प्रशन)

चैप्टर का नाम- भारत के पड़ोसी देश (Neighbouring Countries of India) 


लघु उत्तरीय प्रश्न⇒


1. नेपाल के सर्वोच्च शिखर के नाम एवं ऊँचाई बताएँ । 

उत्तर⇒ नेपाल के सर्वोच्च शिखर का नाम माउण्ट एवरेस्ट है। इसकी ऊँचाई 8,848 मीटर है।


2. नेपाल की तीन प्रमुख नदियों के नाम लिखें। 

उत्तर⇒ नेपाल की तीन प्रमुख नदियों के नाम हैं— कोसी, गंडक तथा घाघरा ।


3. नेपाल के पड़ोसी देश और सीमावर्ती भारतीय राज्यों के नाम लिखें। 

उत्तर⇒ नेपाल के पड़ोसी देशों में केवल दो देश हैं – (चीन) तथा भारत । इसके सीमावर्ती भारतीय राज्यों के नाम है— सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश।


4. भूटान के धरातल का विवरण दीजिए। 

उत्तर⇒ भूटान एक पर्वतीय देश है, जो 26° 45′ एवं 28°20′ उत्तरी अक्षांश तथा 89°45′ एवं 92°05′ पूर्वी देशांतर के मध्य अवस्थित है। भूटान का क्षेत्रफल 46,500 वर्ग किमी है। भूटान के दक्षिणी किनारे पर लगभग 16 किमी चौड़ी समतल सँकरी पट्टी है, जिसको द्वार कहते है, जो 600 मीटर ऊँची है। इस मैदान के उत्तर में निचला हिमालय पर्वत है, जिसकी ऊँचाई 1500 से 3000 मीटर के बीच है। ग्रेटर हिमालय की भूटान में सर्वाधिक ऊँचाई 7574 मीटर है।


5. भूटान के आर्थिक संसाधनों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। 

उत्तर⇒ औद्योगिक दृष्टि से भूटान बहुत पिछड़ा देश है। विषम धरातल, कठोर जलवायु तथा परिवहन के साधनों की कमी के कारण यहाँ संसाधनों का विकास नहीं हो सका है। हाँ, लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास यहाँ हुआ है। यहाँ प्लाइवुड, पैकिंग, डिस्टिलरी, रेजिन और तारपीन के तेल उद्योग स्थापित हैं । यहाँ पर्यटन उद्योग का विकास तेजी से हो रहा है। 

भूटान के मात्र 10% भाग में कृषि होती है। कृषि कार्य आंतरिक घाटियों तथा मध्य ढालों पर होता है। देश के पूर्वी भाग में स्थानान्तरी कृषि होती है। यहाँ चावल, गेहूँ, जौ, मक्का, आलू और अन्य सब्जियाँ उपजाई जाती हैं। कठोर व ऊँची-नीची धरातलीय स्थिति के कारण यातायात के साधनों का विकास बाधित है।


6. सुन्दरी वृक्ष कहाँ पाया जाता है ? 

उत्तर⇒ सुन्दरी वृक्ष सुन्दरवन में पाया जाता है, जो गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियों के डेल्टा क्षेत्र में अवस्थित है।


7. मैग्रोव वन से तुम क्या समझते हो ? 

उत्तर⇒ मैग्रोव वन वैसे वन को कहते हैं, जो ज्वारीय क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगते हैं। भारत के पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश में सम्मिलित रूप से पाए जानेवाले वन मैंग्रोव वन ही है। इस वन को ‘सुन्दरवन’ के नाम से जाना जाता है। सुन्दरी नामक विश्व-प्रसिद्ध वृक्ष तथा विश्व-प्रसिद्ध ‘बाघ’ (रॉयल बंगाल टाइगर) भी इसी वन में मिलते हैं।


8. ढाका नगर की स्थिति एवं महत्व पर प्रकाश डालें। 

उत्तर⇒ ढाका बांग्लादेश की राजधानी है। यह पद्या नदी के तट पर अवस्थित है।


9. बांग्लादेश के धरातल का विवरण दीजिए। 

उत्तर⇒ बांग्लादेश 20° उत्तरी अक्षांश से 97° उत्तरी अक्षांश तथा 85° पूर्वी देशांतर से 93° पूर्वी देशांतर तक फैला हुआ है। यह एक डेल्टाई क्षेत्र है। मैदानी क्षेत्र की समुद्रतल से ऊँचाई सर्वत्र 25 मीटर से कम ही है। डेल्टा क्षेत्र होने के कारण यहाँ का धरातल काफी उपजाऊ है। यहाँ की मुख्य उपज धान है।


10. वांग्लादेश के आर्थिक संसाधनों का संक्षेप में वर्णन करें। 

उत्तर⇒ बांग्लादेश का अर्थतंत्र मुख्य रूप ये कृषि पर टिका है। यहाँ की 80% जनता कृषि – कार्य में लगी हुई है। एकल घरेलू उत्पाद का एक-तिहाई भाग कृषि से प्राप्त होता है । मैंग्रोव वनों में सुन्दरी वृक्ष की अधिकता से लकड़ी उद्योग विकसित है। यद्यपि यहाँ खनिजों का अभाव है, फिर भी कुछ महत्त्वपूर्ण खनिज- कोयला, चूना पत्थर, नमक, काँच का बालू, लोहा तथा प्राकृतिक गैस प्राप्त होते हैं, जो अर्थव्यवस्था को मदद पहुँचाते हैं। बांग्लादेश में आधुनिक उद्योग-धंधों का कोई खास विकास नहीं हो सका है।


11. श्रीलंका की जलवायु किस प्रकार की है ? 

उत्तर⇒ श्रीलंका की जलवायु मॉनसूनी प्रकार की है। विषुवतरेखा इसके निकट से होकर गुजरती है, इसलिए यहाँ सालोंभर गर्मी पड़ती है और वर्षा भी होती रहती है। जाड़े की ऋतु यहाँ नहीं होती है। यहाँ तटीय भाग में वर्षा 200 सेमी तक तथा पर्वतीय क्षेत्रों में 500 सेमी से भी अधिक होती है। यहाँ जाड़े एवं गर्मी की ऋतुओं में वार्षिक तापान्तर (5°C से 7°C) नहीं के बराबर होता है। जाड़े की ऋतु में औसत तापमान 22° सेंटीग्रेड रहता है । पर्वतीय भाग में तापमान 20° सेंटीग्रेड रहता है।


12. ‘पूर्व का मोती’ श्रीलंका को क्यों कहते हैं? 

उत्तर⇒ श्रीलंका में रत्नों का भंडार है। मुख्य रूप से यहाँ नीलम, रक्तमणि, पुखराज, गोमेद आदि पाए जाते हैं। सलोनी गोमेद बड़े महत्त्व का माना जाता है। यहाँ समुद्र से मोती निकालने का व्यवसाय होता है। इस कारण इस द्वीप को ‘पूर्व का मोती’ भी कहा जाता है।


13. श्रीलंका में किस प्रकार की वनस्पति पायी जाती है ? 

उत्तर⇒ विषवुरेखा के काफी निकट होने के कारण श्रीलंका में मुख्य रूप से विषुवतीय प्रकार की वनस्पति पायी जाती है। सूर्य का प्रकाश पाने की होड़ में विषुवतीय वनों के वृक्ष लंबे-से-लंबे होते जाते हैं। वन उतने ही सधन भी होते हैं। वनों में मुख्य रूप से रबर, सिनकोना, गटापार्चा और चेरू के वृक्ष पाए जाते हैं । गटापर्चा और चेरू क्रमशः भारतीय सखुआ और सागवान की तरह होते हैं । यहाँ कुल भूमि के 30 प्रतिशत भाग में वन फैले हुए है। सघन वन मध्यवर्ती पठारों पर पाए जाते हैं।


14. पाकिस्तान को ‘सिंधु की देन’ क्यों कहा जाता है ? 

उत्तर⇒ पाकिस्तान की मुख्य नदी सिंधु है। इसकी सहायक नदियाँ हैं, झोलम, चिनाब, रावी, सतलज एवं व्यास। इन्हें ‘पंचनद’ कहा जाता है। सिंधु सहित सभी नदियों का उद्गम हिमालय पार से है। इसकी सभी सहायक नदियाँ तो सिंधु में मिल जाती हैं, और यह अपना लंबा सफर करता हुआ अरब सागर में गिर जाती है। यह अपने लंबे रास्ते में हजारों वर्षों से अवसाद जमा करती रही है, जिससे पाकिस्तान का मैदानी भाग बना है, जो काफी उपजाऊ है। यह मैदान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यही कारण है कि पाकिस्तान को ‘सिंधु नदी की देन’ कहते हैं।


Class 9th Geography Chapter Wise Short & Long Question | भारत : भूमि एवं लोग (भूगोल) चैप्टर नाम- भारत के पड़ोसी देश (Neighbouring Countries of India)


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न⇒


1. नेपाल की अर्थव्यवस्था का विवरण दीजिए। 

उत्तर⇒ नेपाल की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि के साथ-साथ पशुपालन भी है। मुख्य खाद्यान्नों में चावल, मक्का, गेहूँ, ज्वार-बाजरा आदि उपजाए जाते हैं। इन खाद्यान्नों के अतिरिक्त व्यापारिक फसल भी उपजाए जाते हैं। व्यापारिक फसलों में मुख्य हैं— जूट, गन्ना, फल, तम्बाकू, चाय तथा कपास । कुल कृषि उत्पादन का 70% भाग अकेले तराई क्षेत्र में आता है । काठमाण्डू घाटी में भी सघन खेती होती है, जिसमें चावल, फल और सब्जी उपजाए जाते हैं।


2. नेपाल की जलवायु, मृदा और जलप्रवाह का वर्णन कीजिए। 

उत्तर⇒ नेपाल की जलवायु, मृदा और जलप्रवाह का निम्नांकित रूपों में वर्णन किया गया है— 

नेपाल की जलवायु — यहाँ की जलवायु शीतप्रधान है, जो यहाँ की भू-आकृतियों से प्रभावित है। दक्षिण के तराई भाग को छोड़कर सभी स्थानों पर तापमान न्यून रहता है, क्योंकि यहाँ का 75% भू-भाग समुद्रतल से काफी ऊँचाई पर है। जाड़े में यहाँ का तापमान सामान्यतः 2°C से भी नीचे चला जाता है, वहीं गर्मी में 30°C के आसपास पहुँच जाता है। यहाँ का वार्षिक औसत तापमान 10°C माना जाता है। यहाँ मार्च से अगस्त तक ग्रीष्मऋतु तथा सितम्बर से फरवरी तक शीतऋतु रहती है। गर्मी में मानसूनी हवाओं से नेपाल के पूर्वी भागों में 200 सेमी के आस-पास तथा पश्चिम में 100 सेमी के आस-पास वार्षिक वर्षा होती है। जाड़े में उत्तरी भाग में हिमपात होते हैं तथा शीतकालीन चक्रवातीय वर्षा भी होती है। 

मृदा – नेपाल की तराई एवं घाटियों में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। निचले पर्वतीय ढालों पर लैटेराइट तथा मध्यपर्वतीय प्रदेश में अब उपजाऊ भूरी पॉडजोल मृदा पायी जाती है। पर्वतीय प्रदेश की मृदा भू-क्षरण की समस्या से ग्रस्त है। 

जल-प्रवाह – नेपाल की नदियाँ पूर्व से पश्चिम की ओर तीन नदी तंत्रों में बँटी है— कोसी नदी, गंडक नदी तथा घाघरा नदी । यहाँ की सबसे लंबी नदी करनाली हैं, जो घाघरा की सहायक नदी है। मध्य नेपाल में गंडक को नारायणी नदी कहते हैं तथा पूर्वी नेपाल में कोसी को सप्तकोसी कहते हैं। सभी नदियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होकर भारत की सीमा में प्रवेश करती हैं। ढालुआँ भूमि होने के कारण इन नदियों में तीव्र प्रवाह होती है, जिससे अपरदन की समस्या बनी रहती है, लेकिन दूसरी ओर जलविद्युत् उत्पादन की भारी संभावना भी प्रदान करती है।


3. नेपाल की अर्थव्यवस्था पर उद्योगों के प्रभाव का वर्णन कीजिए। 

उत्तर⇒ चूँकि हम जानते हैं कि नेपाल खनिजों के मामले में विकसित नहीं है, फिर भी अभक वहाँ का मुख्य खनिज है । अल्पमात्रा में लिग्नाइट, ताँबा, कोबाल्ट आदि भी मिलते हैं। शक्ति के साधन के रूप में भारत के सहयोग से देवीघाट जलविद्युत् परियोजना चालू किया गया है। यहाँ जलविद्युत् विकास की असीम संभावनाएँ हैं, लेकिन इसका विकास नहीं के बराबर हुआ है। औद्योगिक कच्चे माल के अभाव में यहाँ के उद्योग भी पिछड़े हुए हैं। इधर आकर कृषि-जनित कच्चे माल से चलनेवाले कुछ उद्योग स्थापित हुए हैं। यहाँ कृषिजनित उद्योग; जैसे- चीनी, जूट, सूती वस्त्र, कागज, वनस्पति तेल, ऊनी वस्त्र आदि उद्योगों का विकास हुआ है। इसके साथ ही सीमेंट, चमड़ा, तम्बाकू, सिगरेट, दियासलाई और कागज के लिए लुगदी बनाने के उद्योग भी फलने-फूलने लगे हैं। 

नेपाल के विदेश व्यापार में भारत, चीन, भूटान, बांग्लादेश आदि की प्रमुखता है। यहाँ से जड़ी-बूटियों जैसे वन-उत्पादों का अधिक निर्यात होता है। 

वैसे कुछ सूती एवं ऊनी वस्त्रों का भी निर्यात होता है। विदेश व्यापार के लिए कोलकाता बंदरगाह का उपयोग होता है, जो नेपाल से निकटतम बंदरगाह है।


3. भूटान का संक्षिप्त परिचय दीजिए। 

उत्तर⇒ भूटान भारत का एक पड़ोसी देश है, जिसकी राजधानी थिम्फू है । भूटान 26° 45′ एवं 28°20′ उत्तरी अक्षांश तथा 89° 45′ एवं 92°05′ पूर्वी देशान्तर के मध्य 38,394 वर्गकिमी क्षेत्रफल में स्थित है। भूटान के उत्तर में चीन (देश), पूर्व में अरुणाचल प्रदेश, दक्षिण में असम तथा पश्चिम में सिक्किम स्थित है। ये सभी भारत के राज्य हैं। भूटान की जलवायु पर्वतीय मॉनसूनी है। यहाँ वर्ष भर कठोर सर्दी पड़ती है। यहाँ वार्षिक वर्षा का औसत 250 सेमी होता हैं। भूटान में 10% से भी कम भूमि पर कृषि कार्य होता है। भूटान की जनसंख्या 7,84,103 है। थिम्पू तथा पुनाखा भूटान के प्रमुख नगर हैं। भूटान की मुख्य फसलें चावल, गेहूँ, जौ, आलू, मक्का तथा सब्जियाँ हैं ।


4. भूटान की जलवायु की विशेषताओं की व्याख्या कीजिए । 

उत्तर : भूटान की जलवायु पर्वतीय मॉनसूनी है। यहाँ तापमान पर ऊँचाई का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। वर्षभर कठोर सर्दी पड़ती है। यहाँ जनवरी में औसत तापमान 4° सेंटीग्रेड तथा जुलाई में औसत तापमान 17° सेंटीग्रेड रहता है। वर्षा मई से सितम्बर के बीच 185 सेमी से अधिक होती है। वार्षिक वर्षा का औसत 250 सेमी होता है। 

मैदानी भाग के द्वार की जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जिसमें जनवरी का महीना ठंढा होता है। लगभग 1050 मीटर से 2250 मीटर ऊँचे पर्वतीय प्रदेशों में: जलवायु शीतोष्ण है। देश की अधिकांश जनसंख्या इसी प्रदेश में निवास करती है। इससे अधिक ऊँचाईवाले भागों की जलवायु बहुत ठंढी है और वे प्रायः बर्फ से ढंके रहते हैं।


5. भूटान की कृषि – विशेषता तथा वहाँ के औद्योगिक विकास का वन कीजिए। 

उत्तर⇒ भूटान की कृषि – विशेषता तथा औद्योगिक विकास का निम्नांकित रूपों में वर्णन किया गया है- 

कृषि-विशेषता यहाँ की 10% से भी कम भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है। कृषि कार्य नदियों की आंतरिक घाटियों एवं मध्यम ढालों पर होता है। दक्षिणी- पश्चिमी भाग में कृषि अधिक विकसित है। पूर्वी भाग में स्थानान्तरण कृषि होती है। फसलों का उत्पादन ढाल व ऊँचाई के अनुसार होता है। चावल, गेहूँ, आलू, मक्का, सब्जियाँ यहाँ प्रमुख रूप से उपजाई जाती हैं। औद्योगिक विकास औद्योगिक दृष्टि से भूटान बहुत पिछड़ा देश है। विषम धरातल, 

कठोर जलवायु, भौगोलिक स्थिति, भौतिक संरचना तथा परिवहन के साधनों की कमी के कारण यहाँ औद्योगिक विकास में भारी कठिनाइयाँ हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ खनिजों का भी अभाव है। कुछ खनिज मिलते भी हैं, तो उनके लिए अन्य मिश्रण के संसाधनों की उपलब्धता नहीं है। यही कारण है कि यहाँ बड़े उद्योगों का पूर्णतः अभाव है। कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग के रूप में केवल पशुपालन पर आधारित और कृषि पर आधारित उद्योगों का कुछ हद तक विकास हुआ है। इसके पश्चात् पर्यटन उद्योग यहाँ की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है। आर्थिक विकास के लिए यह मुख्यतः भारत पर निर्भर करता है। हाल के वर्षों में भारत की मदद से जलविद्युत् के कई केन्द्र विकसित हुए हैं। इन केन्द्रों से भारत को भी विद्युत् की आपूर्ति होती है।


7. बांग्लादेश का भौगोलिक वर्णन विस्तार से कीजिए । 

उत्तर⇒ भौगोलिक दृष्टि से बांग्लादेश 20° उत्तरी अक्षांश से 97 उत्तरी अक्षांश और 85° पूर्वी देशांतर से 93° पूर्वी देशांतर तक विस्तृत है। इसकी सीमा पश्चिम, उत्तर और पूर्व की ओर भारत की सीमा से सटी हुई है, जिसकी लंबाई करीब 4,096 किलोमीटर है। इसके पूर्व में म्यांमार (बर्मा) तथा दक्षिण में बंगाल की खाड़ी स्थित है। उत्तर में भारत के असम तथा मेघालय, पूर्व में त्रिपुरा, मिजोरम एवं पश्चिम बंगाल राज्य स्थित हैं। बांग्लादेश के कुल क्षेत्रफल 148,393 वर्गकिलोमीटर है। 

बांग्लादेश डेल्टाई प्रदेश है, जो विश्व में सबसे बड़े डेल्टा अर्थात् गंगा- ब्रह्मपुत्र डेल्टा के बीच में स्थित है। इस मैदानी देश के अधिकतर भाग की ऊँचाई समुद्रतल से 25 मीटर से भी कम है। डेल्टा क्षेत्र में इन नदियों की ढाल बहुत कम है, जिसके कारण आस-पास के भागों में पानी भर जाता है। मैदान प्रतिवर्ष नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी की परतों से बने हैं, जिसके परिणामस्वरूप भूमि अत्यंत उर्वर है। तटवर्ती क्षेत्र दलदली क्षेत्र है। डेल्टा क्षेत्र में तट के पास नदियों द्वारा जमा की गई मिट्टी के कारण अनेक छोटे-छोटे टापू बन गए हैं बांग्लादेश को नौं भू-आकृतियों में बाँटा गया है— चटगाँव तथा सिलहट्ट की । पहाड़ियाँ, प्राचीन जलोढ़ वेदिकाएँ, टिपरा धरातल, रेतीला जलोदपंख प्रदेश, मोरीबंद डेल्टा, स्थिर डेल्टा, दलदली गर्त, गुम्फित नदीय ‘ज्वार-भूमि’ तथा ज्वारीय डेल्टा । 

पर्वतीय क्षेत्र में केवल पूर्वी तथा दक्षिणी-पूर्वी भाग आते हैं। चटगाँव तथा सिलहट क्षेत्र में कम ऊँचाई की श्रृंखलाओं का विस्तार पाया जाता है। ये पहाड़ियाँ समुद्रतल से औसतन 200 से 300 मीटर की ऊँचाई वाली है। इन पहाड़ियों के बीच पर्वतीय दरें भी हैं।


8. वांग्लादेश की कृषि का आर्थिक महत्त्व बताते हुए प्रमुख व्यापारिक फसलों का वर्णन करें। 

उत्तर⇒ बांग्लादेश के अर्थतंत्र का मूल आधार कृषि ही है। देश के करीब 80 प्रतिशत लोग कृषि कार्य में लगे हुए हैं। करीब 63% भूमि पर कृषि कार्य होता है। कृषि में यहाँ अन्नोत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मछली पकड़ना तथा वानिकी का अधिक महत्त्व है। सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक-तिहाई योगदान कृषि का है। विदेश व्यापार में भी लगभग 50% निर्यात कृषिगत वस्तुओं का हो होता है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि के 82% भाग में से 6% पर जूट, 4% पर गेहूँ तथा अन्य 10% भाग पर सब्जी, फल तथा अन्य नकदी फसलें उपजायी जाती हैं। शेष पर धान की खेती होती है। इस प्रकार हम देखते हैं कि बांग्लादेश में कृषि का सर्वाधिक आर्थिक महत्त्व है। 

व्यापारिक फसलें- 

बांग्लादेश की प्रमुख व्यापारिक फसलें निम्नलिखित हैं- 

(i) चाय—चटगाँव और सिलहट की पहाड़ियों की ढलानों पर चाय की खेती होती है। चाय की खेती का प्रचलन अंग्रेजों ने आरम्भ किया था, जो आज भी हो रहा है। चाय का कुछ भाग तो देश में ही खपत हो जाता है, लेकिन शेष का यूरोपीय देशों को निर्यात कर दिया जाता है। इसका निर्यातक बंदरगाह चटगाँव है । 

(ii) गन्ना — गन्ना एक महत्त्वपूर्ण नकदी फसल है। गन्ना से चीनी बनाई जाती है। घरेलू खपत से बची चीनी को निर्यात कर दिया जाता है।

(iii) तम्बाकू — तम्बाकू भी एक नकदी फसल है। देश में सूरती (खैनी) के रूप में इसका इस्तेमाल होता है। इससे बीड़ी बनती है। शेष बचे तम्बाकू को विदेशों में निर्यात कर दिया जाता है। 

(iv) जूट — डेल्टाई भूमि तथा नदियों की अधिकता के कारण बांग्लादेश में प्रायः सभी जगह जूट उपजाया जाता है। जूट से बने सामानों का तो निर्यात होता ही है, कच्चे जूट का भी निर्यात कर दिया जाता है। जूट उद्योग बांग्लादेश को अर्थव्यवस्था का एक मुख्य आधार है। संसार का 50 प्रतिशत जूट और जूट का सामान बांग्लादेश से ही निर्यात होता है।


9. श्रीलंका की जलवायु का वर्णन कीजिए। 

उत्तर⇒ श्रीलंका की जलवायु का वर्णन करने से पूर्व वहाँ की स्थलाकृति की संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है; क्योंकि किसी भी देश की जलवायु वहाँ की स्थलाकृति की संरचना से प्रभावित होती है। श्रीलंका प्रायद्वीपीय भारत की दक्षिण ओर भारत से लगभग 52 किलोमीटर की दूरी पर हिन्द महासागर में अवस्थित है। श्रीलंका चारों ओर से समुद्र से घिरा है, जिसके कारण पूरे श्रीलंका में समुद्री प्रभाव को देखा जाता है। मध्यवर्ती भाग पर्वतीय है तथा तटीय भाग समतल मैदान है। इसके अलावे रमण, बुद्धपद, आदम आदि अन्य पर्वतशिखर प्रमुख हैं। 

श्रीलंका विषुवतरेखा से काफी निकट होने के कारण यहाँ सालोंभर गर्मी पड़ती है तथा वर्षा भी होती रहती है। यहाँ मुख्य रूप से दो ही ऋतुएँ होती हैं- – ग्रीष्मऋतु तथा वर्षाऋतु । शीतऋतु (20°C से 22°C के बीच तापमान) नाममात्र की होती है। श्रीलंका के तटीय भागों में औसत वार्षिक वर्षा 200 सेमी तथा पर्वतीय भागों में 500 सेमी के लगभग होती है। यहाँ वार्षिक तापान्तर 5°C से 7°C के बीच रहता है, जो नगण्य है।


10. पाकिस्तान की जलवायु की विशेषताओं की व्याख्या करें। 

उत्तर⇒ पाकिस्तान की जलवायु मॉनसूनी एवं उष्णमरुस्थलीय है। यहाँ गर्मी के मौसम में काफी गर्मी तथा जाड़े के मौसम में कड़ाके की सर्दी पड़ती है । जाड़े के मौसम में औसत तापमान 7° सेंटीग्रेड से कम रहता है और उत्तर के पर्वतीय भाग में बर्फ जम जाती है। गर्मी के मौसम में तापमान 45° सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता है। यहाँ स्थित ‘जैकोबाबाद’ का तापमान 55° सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता हैं। यह पाकिस्तान का ही नहीं, बल्कि एशिया का सबसे गर्म स्थान है । पूर्वी मरुस्थलीय भाग में धूलभरी आँधियाँ चलती हैं और चारों ओर रेत के टीले भी दिखाई देते हैं। इन टिलों को भूगोल की भाषा में ‘बलुआ टिब्बा’ कहा जाता है। पाकिस्तान में मुख्यतः वर्षा का अभाव होता है, वार्षिक वर्षा का औसत मात्र 35 सेंटीमीटर है। जाड़े में चक्रवातों द्वारा और गर्मियों में बंगाल की खाड़ी से आनेवाले मॉनसूनी पवनों से वर्षा होती है। यहाँ वर्षा का वितरण असमान है। उत्तर के पर्वतपदीय क्षेत्र में 75 से 80 सेंटीमीटर और पूर्वी मैदान में 35 से 50 सेंटीमीटर वर्षा होती है, जबकि पश्चिमी क्षेत्र में 10-25 सेंटीमीटर ही वर्षा होती है। अतः पाकितानी जलवायु पर वहाँ की नदियों तथा पहाड़ का भी प्रभाव पड़ता है।


11. पाकिस्तान के खनन एवं उद्योगों के विकास का वर्णन करें। 

उत्तर⇒ पाकिस्तान खनिज पदार्थों के मामले में एक गरीब देश हैं । यहाँ मुख्य रूप से कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, क्रोमाइट, जिप्सम, लोहा, सेधा नमक, चूना पत्थर, बॉक्साइट एवं गंधक प्राप्त होते हैं। खनिज तेल का उत्पादन बालाकासार, खैरपुर, अटक और चाकवाल में होता है। रावलपिंडी, मजराबल और हैदराबाद के कई क्षेत्रों में कोयला का खनन किया जाता है। अटक, सरगोधा, जितरल एवं मियाँवाली क्षेत्र से लौह-अयस्क प्राप्त किया जाता है। बलूचिस्तान की जोब घाटी में क्रोमियम का भंडार है । मैंगनीज लासबेला और कोहाट क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। प्राकृतिक गैस के मुख्य क्षेत्र है— सूई, खैरपुर और लायलपुर । 

पाकिस्तान में कृषि एवं रसायन पर आधारित उद्योगों का विकास किया गया है। इनमें सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, चीनी, खेल के सामान, कागज, रासायनिक तथा दियासलाई के उद्योग प्रमुख हैं। खनिज पर आधारित उद्योगों में सीमेंट, तेलशोधक एवं प्राकृतिक गैस पर आधारित उद्योग हैं। वन आधारित उद्योगों में खेल के सामान को तैयार करने के लिए स्यालकोट सारे विश्व में प्रसिद्ध है। 

मुलतान, कराची, लायलपुर, लाहौर, उकाड़ा, आदि सूत एवं सूती वस्त्र- उद्योग के प्रमुख केन्द्र रहे हैं। हरनाई, बन्नू एवं काडियाबाद ऊनी वस्त्र के केन्द्र हैं। नोशेरा और रहबाली में फाइन पेपर तथा दफ्ती पेपर उद्योग बाँस पर आधारित हैं। चारसद्दा, कारदान, औहराबाद में चीनी की मिले स्थापित हैं


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